मुद्दतों के बाद कुछ लिखने चले हैं,
अपनी कलम को खुश्क करने चले हैं,
गुजर गया है वो ज़माना कभी का,
जिसे आज हम नया करने चले हैं।
याद करते हैं उन शहीदों को हम,
सलाम करते हैं उन शहीदों को हम,
कतरा-कतरा आजादी पर न्योछावर किया,
कि उन्हें आज केवल सांत्वना देने चले हैं।
अरे मेहजबानो देना है तो दुनिया को वो भारत दो,
जहाँ आपसी भाईचारा व मानवता की मिसाल हो,
न कोई निर्भया जैसे कांड न उरी जैसे उत्पाद हो,
बेशुमार मानवता में अपना हिन्दोस्तान महान हो।
S. S. PARVEEN
अपनी कलम को खुश्क करने चले हैं,
गुजर गया है वो ज़माना कभी का,
जिसे आज हम नया करने चले हैं।
याद करते हैं उन शहीदों को हम,
सलाम करते हैं उन शहीदों को हम,
कतरा-कतरा आजादी पर न्योछावर किया,
कि उन्हें आज केवल सांत्वना देने चले हैं।
अरे मेहजबानो देना है तो दुनिया को वो भारत दो,
जहाँ आपसी भाईचारा व मानवता की मिसाल हो,
न कोई निर्भया जैसे कांड न उरी जैसे उत्पाद हो,
बेशुमार मानवता में अपना हिन्दोस्तान महान हो।
S. S. PARVEEN
Shandaar
ReplyDeleteBahut badiya lajabaj
ReplyDeleteSuper
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