हर सुकून है तेरे आशियाने में क्या रख्खा है इस जमाने में प्यार का जहाँ आबाद था दिल में क्या रख्खा है इन चरागों को सुलगाने में।
खुदा का नायाब तोह्फ़ा है तू , उसकी रहमत का करिश्मा है तू , रखता हूं तुझे बड़ी नाज़ो से मैं , बरकत का जैसे कोई फरिश्ता है तू । S S PARVEEN